जौनपुर: महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प

जौनपुर: महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प

जौनपुर। कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष फैसल हसन तबरेज के अध्यक्षता में कांग्रेस जन जिला कांग्रेस कार्यालय से गांधी तिराहे तक किर्तन करते हुए मार्च निकाला और गांधी जी के प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित किया गया और सभी कांग्रेस जनों ने नम आंखों से मौन रखकर गांधी जी के आत्मा को नमन किया। महात्मा गांधी जी के बनाये हुए मार्गों पर चलने का संकल्प भी लिया।
       फैसल हसन तबरेज ने कहा कि बापू के विचारों को देश व पूरा विश्व मानता है जिसका मुख्य सिद्धांत, अहिंसा एवं विश्व की सभी वस्तुओं को शाश्वत मानना है। इस प्रकार, उन्होंने स्वाभाविक रूप से अहिंसा, शाकाहार, आत्मशुद्धि के लिए उपवास और विभिन्न पंथों को मानने वालों के बीच परस्पर सहिष्णुता को अपनाया। 1906 में टांसवाल सरकार ने दक्षिण अफीका की भारतीय जनता के पंजीकरण के लिए विशेष रूप से अपमानजनक अध्यादेश जारी किया। भारतीयों ने सितंबर 1906 में जोहेन्सबर्ग में गांधी के नेतृत्व में एक विरोध जनसभा का आयोजन किया और इस अध्यादेश के उल्लंघन तथा इसके परिणामस्वरूप दंड भुगतने की शपथ ली।
            इस प्रकार सत्याग्रह का जन्म हुआ, जो वेदना पहुंचाने के बजाय उन्हें झेलने, विद्वेषहीन प्रतिरोध करने और बिना हिंसा किए उससे लड़ने की नई तकनीक थी इसके बाद दक्षिण अफ्रीका में सात वर्ष से अधिक समय तक संघर्ष चला इसमें बहुत से उतार-चढ़ाव आते रहे, लेकिन गांधी के नेतृत्व में भारतीय अल्पसंख्यकों के छोटे से समुदाय ने अपने शक्तिशाली प्रतिपक्षियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। 
              सैकड़ों भारतीयों ने अपने स्वाभिमान को चोट पहुंचाने वाले इस कानून के सामने झुकने के बजाय अपनी आजीविका तथा स्वतंत्रता की बलि चढ़ाना ज्यादा पसंद किया। 1919 में अंग्रेजों के बनाए रॉलेट एक्ट कानून पर जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए जेल भेजने का प्रावधान था, उन्होंने अंग्रेजों का विरोध किया फिर गांधी जी ने सत्याग्रह आन्दोलन की घोषणा कर दी। इसके परिणामस्वरूप एक ऐसा राजनीतिक भूचाल आया। जिसने 1919 के बसंत में समूचे उपमहाद्वीप को झकझोर दिया इस सफलता से प्रेरणा लेकर गांधी जी भारतीय स्‍वतंत्रता के लिए किए जाने वाले अन्‍य अभियानों में सत्‍याग्रह और अहिंसा के विरोध जारी रखे, जैसे कि 'असहयोग आंदोलन', 'नागरिक अवज्ञा आंदोलन', 'दांडी यात्रा' तथा 'भारत छोड़ो आंदोलन'। गांधी जी के इन सारे प्रयासों से भारत को 15 अगस्‍त 1947 को स्‍वतंत्रता मिल गई बापू के प्रति सत्ता के लालची देश बिरोधी लोगों की रणनीतिया, रंजीसे  बनने लगी और 30 जनवरी 1948 की शाम को नई दिल्ली स्थित बिड़ला भवन में शाम को जब वे संध्याकालीन प्रार्थना के लिए जा रहे थे तभी दुराचारी नाथूराम गोडसे ने पहले उनके पैर छुए और फिर सामने से उन पर पिस्तौल से तीन गोलियाँ दाग कर हत्या कर दी।
         शहर अध्यक्ष सौरभ शुक्ला ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए  कांग्रेसजनों से कहा आज हम यह संकल्प लेते हैं हम गांधी जी के विचारों की हत्या नहीं होने देंगे सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलेंगे और जात-पात के भेदभाव से ऊपर उठकर हम नए समाज की स्थापना करेंगे। इस अवसर पर महिला जिला अध्यक्ष डॉ चित्रलेखा, धर्मेंद्र निषाद, राकेश सिंह डब्बू, राजेश गौतम, आज़म ज़ैदी, डा महारुद्र सिंह, विशाल सिंह हुकुम, मुफ़्ती मेहदी,गौरव सिंह शनी,संदीप सोनकर,शिव मिश्रा, इकबाल, निसार इलाही, उस्मान अली,राजन तिवारी नीरज राय,इश्तेयाक, मो फ़ैज़,मो  सलाह,मो खान, महमूद खान,जाहिद मनसुरी, सतीश निषाद,कैफ राइन,कलेन्दर,सैयद फरमान हैदर,हसीब खान,बेलाल नदीम,शाहिद शेख,सूरज उपाध्याय, सुभाष सोनकर,असरफ अली,वब्बी खान, दिवाकर निषाद, राजकुमार गुप्ता,बब्लू गुप्ता,अमित तिवारी, इन्द्रमणी दूबे। संचालन अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष रेयाज अहमद ने किया।